हजारों करोड़ रुपए का सिनेमा उद्योग एक फिल्म स्टार का मोहताज

हजारों करोड़ रुपए का सिनेमा उद्योग एक फिल्म स्टार का मोहताज


सलमान खान की फिल्म ‘राधे : द मोस्ट वांटेड भाई’ इस साल मई के दूसरे सप्ताह में ईद पर सिनेमाघरों में रिलीज हो, इस बात की गुहार सिनेमाघरों के मालिकों ने सलमान खान से की है। सिनेमाघर मालिकों को लग रहा है कि उनके चौपट पड़े धंधे में सलमान खान ही जान डाल सकते हैं। आधी क्षमता के साथ सिनेमाघर खोलने के फिल्मजगत में जो परिणाम होने हैं, वे नजर आने लगे हैं। कुल मिलाकर ऐसी स्थिति में सिनेमाघरों को लेकर छीनाझपटी शुरू हो चुकी है।

फिल्म प्रदर्शक और सिनेमाघरों के मालिक ने सलमान खान से गुहार लगाई है कि उनके धंधे को सिर्फ भाईजान ही बचा सकते हैं। सिनेमाघर सूने पड़े हैं। फिल्में देखने कोई आ नहीं रहा है। मुंबइया जुबान में कहें तो धंधे की वाट लगी पड़ी है। इसलिए सलमान खान अपनी फिल्म ‘राधे- द मोस्ट वांटेड भाई’ को सिनेमाघरों में रिलीज करेंगे तो बड़ी मेहरबानी होगी।

भाई के नाम में इतना दम है कि लोगों को घरों से निकाल कर थियेटर ले आएंगे और सिनेमाघर गुलजार हो जाएंगे। कुल मिलाकर कोरोना का प्रभाव फिल्मजगत पर ऐसा पड़ा है कि हजारों करोड़ रुपए का उद्योग एक फिल्म स्टार का मोहताज हो गया है। सरकार ने बीते साल15 अक्तूबर से सिनेमाघरों को 50 फीसद क्षमता के साथ खोलने की घोषणा की थी, तब से तीन महीने गुजर चुके हैं मगर सिनेमाघरों की मुर्दनी दूर नहीं हुई है।

दक्षिण में अपने फैन क्लब के दम पर रवि तेजा की तेलुगू ‘क्रेक’ और विजय की तमिल फिल्म ‘मास्टर’ ने सिनेमाघरों में भीड़ जुटाई मगर महाराष्ट्र और उत्तर भारत के सिनेमाघरों में अभी भी कौवे बोलने जैसी स्थिति है। छोटे बजट की जो हिंदी फिल्में रिलीज हुई उनके लिए लागत निकालनी भारी पड़ी। बड़े बजट की लोकप्रिय सितारों वाली फिल्मों के समझदार निर्माता हालात देखकर चुप बैठे हैं कि आधे धंधे से पूरी लागत कैसे निकलेगी। वे इंतजार कर रहे हैं कि 100 फीसद क्षमता के साथ सिनेमाघर खुलने की घोषणा हो, तो वे अपनी फिल्में रिलीज करें। इस चक्कर में फिल्मों की लाइन लगनी शुरू हो गई है।

अब होगा यह कि यश चोपड़ा की कंपनी यशराज फिल्म्स भाईजान की फिल्म मई के दूसरे हफ्ते में ईद पर रिलीज करेगी। यानी 12/13 मई को। आधी सीटें खाली रखनी पड़ेंगी। इसलिए या तो टिकटों के दाम बढ़ाए जाएंगे या ज्यादा से ज्यादा सिनेमाघरों में ‘राधे’ रिलीज करनी होगी, ताकि लागत जल्दी निकल सके। यह स्थिति आज हर दूसरे निर्माता के सामने है। इस स्थिति में जो फिल्में पहले से चल रही होंगी, उन्हें सिनेमाघरों से खदेड़ा जाएगा और सिनेमाघरों में सिर्फ ‘राधे राधे’ होगी।

ताकतवर निर्माता-वितरक की फिल्म रिलीज होती है, तो ऐसा ही होता है। तब कमजोर निर्माता-वितरक की फिल्म को निकाल बाहर किया जाता है या उसे सिनेमाघर ही नहीं मिलने दिए जाते। याद कीजिए 2012 में जब यश चोपड़ा की शाहरुख खान अभिनीत ‘जब तक है जान’ रिलीज हो रही थी, तो अजय देवगन की ‘सन आफ सरदार’ को सिनेमाघर मिलने मुश्किल हो गए थे। गुस्से में देवगन पहुंच गए थे शिकायत दर्ज करने के लिए कॉम्पटीशन कमिश्नर आफ इंडिया के पास।

छोड़िए 2012 को। पुरानी बात है। 2021 का नया मामला देखिए। नौ जनवरी को रवि तेजा की तेलुगू फिल्म ‘क्रेक’ रिलीज हुई। अच्छी भली चल रही थी। 13 जनवरी को विजय की तेलुगू फिल्म ‘मास्टर’ रिलीज हुई तो निजाम वितरण क्षेत्र के कई सिनेमाघरों से ‘क्रेक’ को खदेड़ा जाने लगा। बिलबिलाए वितरक ने ‘मास्टर’ के निर्माता दिल राजू को ‘किल राजू’ तक कह डाला क्योंकि वह उनका धंधा किल कर रहे थे। तो ऐसी स्थिति में जब धंधा आधा हो चुका है, सिनेमाघरों की छीनाझपटी के कई मामले जल्दी ही सामने आएंगे। तब तक इंतजार कीजिए और जपिए ‘राधे राधे’।

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